*शैतान की शैतानी* 👇👇
*1925 – 26 से ही बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर जी ‘अछूतों ‘ को ब्राह्मणों जैसे हक अधिकार दिलाने के लिए प्रयास रत थे ।*
*भारत में अंग्रेजों के आने से पहले हिंदुओं द्वारा ‘ अछूतों ‘ पर बेरहम जुल्म , सितम , अत्याचार किए जा रहे थे । ‘ अछूत ‘ लोग जिनको ‘ कमीन ‘ भी कहा जाता था, बड़ी हिम्मत से सारे अत्याचार सहन कर रहे थे ।*
*जब बाबासाहब इंगलैंड में पढ़ा करते थे तो वहाँ के कानून कायदों से भली भाँति परिचित थे ।*
*एक बड़ा सवाल बाबासाहब ने अंग्रेजी हुकूमत से किया । ” जब आप के इंगलैंड में वर्ण भेद / जातिभेद नहीं है तो, भारत में क्यों है ? यहाँ भी तो आपका ही राज है ! ” तो वायसराय ने कहा कि हम नहीं जानते भारत में कहाँ किसके साथ क्या भेदभाव हो रहा है ?*
*बाबासाहब ने पूछा , ” जानना चाहोगे? ” हाँ अगर आप बता सकते हो तो पूरे विस्तार से बताइये । ” तो बाबा साहब ने कहा, ” मैं सबकुछ बताऊंगा, मुझे कुछ समय दीजिए ।”*
*वायसराय ने कहा, ” Yes, take your own time !”*
*1925 में बाबासाहब ने सारे भारत में ” शूद्र नीच अछूत कमीन लोगों पर जो जो* *प्रताड़ना, जुल्म, सितम , अत्याचार हो रहे थे, सब लिख कर एक ज्ञापन के रूप में वायसराय को दिया ।*
*400 पन्ने का यह ज्ञापन वायसराय ने पूरा पढ़ा और बाबासाहब से कहा कि यह ज्ञापन महा रानी को भेजा जाएगा । क्या आप सहमत हैं ? तो बाबा साहब ने कहा, “*
*It would be a great opportunity for the 85% population of India, called Sudra’s !”*
*400 पन्ने का यह ज्ञापन पत्र महारानी को भेजा गया । महारानी ने बड़े कोतुहल से इसे पढ़ा । महारानी के विष्मय का ठिकाना नहीं रहा ।* *बाबासाहब को सूचना दी गई कि महारानी इन सब उल्लेखित बातों की तहकीकात करने के लिए एक कमिशन इंडिया में भेज रही है ।*
*सात सदस्यों का यह कमीशन था जिसके हैड थे, Sir John Simon ! ” *इसलिए इसको साइमन कमीशन कहा गया ।*
*1928 में यह कमीशन भारत आया । पूरे देश में गांधी जी के नेतृत्व में इस कमीशन को काले झंडे दिखाये गए ।*
*” साइमन गो बैक ” के नारों से भरपूर विरोध किया गया ।*
*इस विरोध में 17/11/1928 को लाहोर में पुलिस की लाठियों से लाला लाजपत राय मारे गए ।*
*इस प्रकार से हिंदुओं ने ‘अछूतों ‘ को अधिकार रहित रखने के लिए पहली कुर्बानी दी ।*
*हमारी मूर्खता देखो , हम आज भी उन्हीं लोगों से अपने भले की उम्मीद लगाए बैठे हैं ! !*
*हमारे समाज में आज भी अनेक ऐसे लोग हैं जिन्हें अपने इतिहास का ज्ञान ही नहीं है !*
*हमारे बुजुर्ग तो अनपढ़ थे लेकिन आज हमारे कई Ph.D किये लोग भी , उन अनपढ़ लोगों से भी गए बीते हैं ।*
*घोर विरोध के बावजूद भी बाबासाहब ने साइमन को कई जगहों पर साथ लेकर गये ओर ले जा कर भारत में अछूतों की प्रत्यक्ष असलियत दिखाई ।*
*साइमन ने जो कुछ देखा उसकी सही सही रिपोर्ट महारानी को भेजी ।*
*महारानी ने दोनों पक्षों को आमने सामने बिठा कर बात करनी चाही ।*
*गोलमेज़ कांफ्रेंस की व्यवस्था की गई । बाबासाहब को तथा कांग्रेस नेताओं को निमंत्रण पत्र भेजे गए ।*बाबासाहब को बहुत खुशी हुई और गाँधी जी की शामत आ गई । गाँधी जी ने इस कांफ्रेंस का विरोध किया और उपस्थित नहीं हुए ।*
*बाबासाहब गए और पूरी क्षमता से अपना तथा भारत की असलियत का स्पष्ट चित्र खींच कर रख दिया ।*
*यह इकतरफा कांफ्रेंस बेनतीजा रही अत: दूसरी कांफ्रेंस 1931 में रखी गई ।*
*इस कांफ्रेंस में गांधी जी गए और वहाँ अंग्रेजी हुकूमत के सामने बाबासाहब के खिलाफ अपने आप के लिए ‘ अछूतों ‘ का एकमात्र नेता होने का दावा किया ।*
*तब बाबासाहब ने कहा कि आप अछूतों के नेता हैं तो आपको अछूतों के जीवन के सभी क्रियाकलापों की अवश्य ही जानकारी होगी । तो गांधी जी ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा, ” हाँ ! मैं सबकुछ जानता हूँ ।*
*प्रधानमंत्री क्लिमेंट रिचर्ड ऐटली ये सब नोट कर रहे थे ।*
*तब बाबासाहब ने पूछा कि उस औजार का नाम बताओ जिससे अछूत लोग पशुओं की खाल निकालते हैं ?*
*गांधी जी बगलें झाँकने लगे । अगले दिन कांफ्रेंस छोड़ कर गांधी जी अपना सा मुँह ले कर वापस भारत आ गए । कांफ्रेंस पुन: बेनतीजा रही ।*
*1932 में तीसरी बार कांफ्रेंस बुलाई गई ।*
*तीसरी गोलमेज़ कांफ्रेंस में बहुत गर्मागर्मी रही । सभी ने बाबासाहब को अछूतों का नेता मान लिया था । अब गांधी जी के पास बाबासाहब के प्रहारों से रक्षात्मक रवैये के अलावा कोई चारा नहीं था । बहुत गहमा गहमी रही । कांफ्रेंस लम्बी चली ।*
*आखिर कांफ्रेंस खत्म हुई ।*
*इस कांफ्रेंस का नतीजा यह रहा कि अछूतों के लिए Communal Award की घोषणा की गई ।*
*यह ऐसा कानून बन कर आया जिसमें अछूतों के लिए अलग चुनावक्षेत्र ( Separate Electoral Constituency ) की व्यवस्था की गई ।*
*इस कानून में व्यवस्था थी कि जिस चुनावक्षेत्र में अछूतों की बहुलता होगी वह अछूतों के लिए आरक्षित होगा ।* *वहाँ से केवल अछूत ही चुनाव लड़ेंगे और केवल अछूत ही मतदान करेंगे उस क्षेत्र में अन्य किसी को भी मतदान करने का अधिकार नहीं होगा ।*
*लेकिन अन्य जनरल चुनावक्षेत्रों में रहने वाले अछूत भी चुनाव में भाग लेंगे, मतदान करेंगे । इसे दो वोट का अधिकार कहा गया ।*
*उस समय गांधी जी पूना की यरवदा जेल में थे । इस कानून की भनक लगते ही वह चिल्लाने लगे ।*
*मैं अछूतों को इतने अधिकार नहीं दे सकता ।*
*कल सुबह से मेरा आमरण अनशन शुरू होगा ।या तो यह कानून मेरे प्राण ले लेगा, या मैं इसे खत्म कर दूंगा । “*
*पूरे भारत में दावानल की तरह यह खबर फैल गई ।*
*अछूतों के अधिकारों को निगलने के लिए लाला लाजपत राय के बलिदान से भी बड़े बलिदान की बलिवेदी तैयार होने लगी ।*
*चार पाँच दिन में गांधी जी मरणासन्न पहुँच गए ।*
*बाबासाहब पर चारों ओर से दबाव बनाया जाने लगा ।*
*विभिन्न प्रकार के डर बाबासाहब को दिखाए गए ।*
*किसी ने कहा, मि. अम्बेडकर , अगर गाँधी जी मर गए तो सारे देश में हाहाकार मचेगी । तुम्हारे अछूत सब मारे जाएंगे फिर किस काम के रह जाएंगे ये अधिकार ?*
*अंत में कस्तूरबा गाँधी ने आ कर बाबासाहब के सामने झोली फैला कर अपने सुहाग की भीख मांगी ।*
*अबला की आँखों से टपकते आँसू देखकर , बाबासाहब का वज्र दिल मोम की तरह पिंघल गया ।*
*मजबुर होकर तुरंत बाबासाहब यरवदा जेल गए वहाँ पर संतरे का रस पिला कर गाँधी जी को प्राणदान दे कर उन्हीं की शर्तों पर समझोता किया ।*
*हमें झुठी पुस्तकों में पढ़ते रहे कि महात्मा गांधी ने अछूतों के उद्धार के लिए मरणव्रत रखा जिसे एक अछूत के हाथ से ही संतरे का रस पी कर तोड़ा गया । *उस अछूत का नाम तक लिखने में इनकी नानी मरी जा रही थी ।*
*इस समझोते को ” पूना पैक्ट ” के नाम से विश्व भर में जाना जाता है ।*
*इस पर गाँधी जी हस्ताक्षर करने की स्थिती में नहीं थे तो बाबासाहब के साथ मदन मोहन मालवीय जी ने अपने हस्ताक्षर किए ।*
*बाबासाहब के पहुँचने से पहले ही लिखे जा चुके इस समझोते में Separate Electoral Constituency के कानून को अमान्य घोषित करके बदले में आरक्षण की व्यवस्था का लॉलीपॉप थमा दिया गया था ! इस अत्यंत चालाकी पूर्ण समझोते का दुष्परिणाम ही है , कि आज भारत की लोकसभा में आरक्षित सीटों से चुन कर गए हुए SC, ST के सांसद, दलितों पर होने वाले अत्याचार , अन्याय, जुल्मो सितम के विरोध में कोई भी मुँह नहीं खोल सकता !*
*क्योंकि वे बहुजन समाज द्रोही लोग, इन अत्याचारियों की ही गोद में बैठे हैं । ये अत्याचारी, शोषणवादी लोग आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ाने के लिए तो बहुजन समाज के विभीषणों को ढ़ूंढ लेते हैं लेकिन इनको जनरल सीटों पर चुनाव लड़ाने के योग्य कोई विभीषण नहीं मिलता ।*
*इसी परिणाम को गाँधी जी ने अपनी गिद्ध दृष्टि से देख लिया था । बाबासाहब भी इस परिणाम से अनभिज्ञ नहीं थे, लेकिन हजारों मनुवादीयों के बीच में अकेला ‘ बाबा साहेब जंग में थे और बहुत कुछ कर कर गये*
*वे एक अकेले महामानव जो बगीचा लगा गए मिठ्ठे फलों का , आज कायर गीदड़ों के झुंड की तरह से करोड़ों बहुजन समाज के लोग उसकी रक्षा नहीं कर पा रहे हैं ।*
*धिक्कार है बहुजन नाम के इन ‘मक्खियों’ की तरह भिनभिनाते झुंड को !*
*सवर्ण लोगों का इन घिनौने ‘ दो पाये जानवरों ‘ की छाया से नफरत करना वाकई जायज था !*
*आज भी ये स्व: घाती, जहरीले कीड़े मकोड़े नफरत के ही काबिल हैं ।*
*जय भीम !*
*जय भारत ! !*
*जय संविधान!!!*
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
Leave a comment